गैर कृषक हिमाचली की à¤à¤•मातà¥à¤° मांग है कि नागरिकों की दो शà¥à¤°à¥‡à¤£à¤¿à¤¯à¤¾à¤‚ जो Himachal Pradesh tenancy and land reforms act 1972 की धारा 118 लागू करते वकà¥à¤¤ छूट देने से रह गई थी उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ इसमें शामिल कर लेना चाहिà¤à¥¤ गेर कृषक à¤à¤•ता मंच ’के सदसà¥à¤¯ सà¥à¤¨à¥€à¤² जोशी ने बताया “अधिनियम के अधà¥à¤¯à¤¾à¤¯ XI में ‘à¤à¥‚मि के हसà¥à¤¤à¤¾à¤‚तरण पर नियंतà¥à¤°à¤£’ में धारा 118 शामिल है जो बताता है कि ‘गैर-कृषकों को à¤à¥‚मि का हसà¥à¤¤à¤¾à¤‚तरण वरà¥à¤œà¤¿à¤¤’â€à¥¤ अकà¥à¤Ÿà¥‚बर 1975 में अधिनियम को ततà¥à¤•ाल पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ से अधिसूचित किया गया था। इसके बाद उस अवधि से पहले यहाठरहने वाले गैर कृषक हिमाचली को à¤à¥€ बाहरी राजà¥à¤¯ के अनà¥à¤¯ लोगों की तरह धारा 118 के कारण, बिना अनà¥à¤®à¤¤à¤¿ के राजà¥à¤¯ में किसी à¤à¥€ तरह की कृषि à¤à¥‚मि खरीदने से रोक दिया गया।
1975 में अधिनियम को अधिसूचित करते हà¥à¤ ततà¥à¤•ालीन राजà¥à¤¯ सरकार ने अधिनियम में नागरिकों की कà¥à¤› शà¥à¤°à¥‡à¤£à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ के लिठअनà¥à¤•ूल पà¥à¤°à¤¾à¤µà¤§à¤¾à¤¨ रखे। उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने कहा कि धारा 118 से अलग रखे जाने वाले नागरिकों नागरिकों में अनà¥à¤¸à¥‚चित जाति / अनà¥à¤¸à¥‚चित जनजाति, गà¥à¤°à¤¾à¤® के कारीगर और à¤à¥‚मिहीन वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ (जैसे कृषि शà¥à¤°à¤® आदि) शामिल हैं। अधिनियम के अधà¥à¤¯à¤¾à¤¯ XI की उपधारा 2 (à¤) (बी) (सी) (डी) के अनà¥à¤¸à¤¾à¤°, राजà¥à¤¯ के इन नागरिकों की शà¥à¤°à¥‡à¤£à¥€ को 118 से छूट मिली है। परंतॠततà¥à¤•ालीन सरकार इन लोगों के साथ दो और शà¥à¤°à¥‡à¤£à¤¿à¤¯à¥‹ के नागरिकों को इसमे शामिल करना शायद à¤à¥‚ल गई। यह à¤à¥€ वह नागरिक थे जो राजà¥à¤¯ के लिठबाकियों की ही तरह खून पसीना बहा रहे थे । उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने कहा कि ये थे छोटे वà¥à¤¯à¤µà¤¸à¤¾à¤¯à¥€ और सरकारी करà¥à¤®à¤šà¤¾à¤°à¥€ ।
1948 के बाद, हिमाचल को केंदà¥à¤° शासित पà¥à¤°à¤¦à¥‡à¤¶ का हिसà¥à¤¸à¤¾ बना दिया गया; इसके बाद 1966 में यह गà¥à¤°à¥‡à¤Ÿà¤° पंजाब बन गया। इस अवधि के दौरान बाहरी राजà¥à¤¯ से कà¥à¤› छोटे कारोबारी वà¥à¤¯à¤¾à¤µà¤¸à¤¾à¤ के सिलसिले से यहाठरहने लगे और अनà¥à¤¯ सरकारी करà¥à¤®à¤šà¤¾à¤°à¥€ थे। यह लोग यहीं पर बस गठऔर जिनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ हम गेर कृषक हिमाचली की शà¥à¤°à¥‡à¤£à¥€ से जानते हैं ।
“हालांकि 118 के उप-धारा 2 (जी) (à¤à¤š) के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° गैर कृषक नागरिक राजà¥à¤¯ में à¤à¥‚मि खरीद सकते हैं। लेकिन सीमित à¤à¥‚मि खरीदने की अनà¥à¤®à¤¤à¤¿ है और केवल à¤à¤• बार और इसलिठइसे विशेष रूप से गैर कृषक हिमाचली नागरिकों के लिठà¤à¤• अनà¥à¤•ूल कदम नहीं माना जा सकता है । सà¥à¤µà¤¾à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤• रूप से यदि à¤à¤• गैर कृषक हिमाचली नागरिक को à¤à¤• समय सीमित à¤à¥‚मि खरीदने की अनà¥à¤®à¤¤à¤¿ दी जाती है, तो यह उनकी आने वाली पीढ़ियों के साथ गंà¤à¥€à¤° अनà¥à¤¯à¤¾à¤¯ है। “परिवार समय के साथ बढ़ते हैं और à¤à¤¸à¥‡ नागरिकों की अगली पीढ़ी à¤à¥€ पहाड़ी राजà¥à¤¯ में ही जनà¥à¤® लेगी। जाहिर है कि उनमें से कई काम करेंगे और यहां बसेंगे और उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ और जमीन की जरूरत होगी।“ जोशी ने पà¥à¤°à¤¶à¤¨ उठाया की कà¥à¤¯à¤¾ यह संà¤à¤µ की 4 इंसानों के रहने के लायक जगह मे 10 लोग गà¥à¤œà¤¼à¤¾à¤°à¤¾ कर सकें ।
दà¥à¤°à¥à¤¦à¤¶à¤¾ में जोड़ने के लिà¤, यदि कोई गैर-कृषक हिमाचली नागरिक खेती को पेशा बनाना चाहता है, तो वह सरकारी अनà¥à¤®à¤¤à¤¿ के साथ à¤à¤• बार कृषि à¤à¥‚मि खरीद सकता है, लेकिन उसे ‘कृषक’ का दरà¥à¤œà¤¾ नहीं दिया जाà¤à¤—ा (धारा 118 में पà¥à¤°à¤¾à¤µà¤§à¤¾à¤¨ के कारण) । जोशी ने कहा यह घोर अनà¥à¤¯à¤¾à¤¯ है कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि गैर-कृषक हिमाचली नागरिक à¤à¥€ 2-3 पीढ़ियों से पहाड़ी राजà¥à¤¯ के लिठखून-पसीना बहा रहे हैं।
राजà¥à¤¯ सरकार को दिठगठà¤à¤• पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¨à¤¿à¤§à¤¿à¤¤à¥à¤µ में इस à¤à¤¸à¥‹à¤¸à¤¿à¤à¤¶à¤¨ ने अनà¥à¤°à¥‹à¤§ किया है कि इन दो शà¥à¤°à¥‡à¤£à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ (पेटी वà¥à¤¯à¤µà¤¸à¤¾à¤¯à¥€ और सरकारी करà¥à¤®à¤šà¤¾à¤°à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ जो निशà¥à¤šà¤¿à¤¤ तारीख / वरà¥à¤· से पहले यहां बसे) को à¤à¥€ धारा 118 के उप-खंड 2 में जोड़कर राहत दी जानी चाहिà¤à¥¤ जोशी ने माà¤à¤— की “हम में से कई जो 1974 से पहले राजà¥à¤¯ में बस गठथे, और अà¤à¥€ à¤à¥€ यहां रह रहे हें उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ अनà¥à¤¯ सà¤à¥€ हिमाचली नागरिकों की तरह समान दरà¥à¤œà¤¾ दिया जाना चाहिà¤à¥¤â€œ
हालाà¤à¤•ि मà¥à¤–à¥à¤¯à¤®à¤‚तà¥à¤°à¥€ ने इस मामले को देखने का आशà¥à¤µà¤¾à¤¸à¤¨ तो दिया है पर हर बार जब à¤à¥€ कोई सरकार धारा 118 में बदलाव करने की कोशिश करती है, तो यह à¤à¤• राजनीतिक मà¥à¤¦à¥à¤¦à¤¾ बन जाता और इसमें गैर कृषक हिमाचलियों की वासà¥à¤¤à¤µà¤¿à¤• मांग दब जाती है।शायद कोरà¥à¤Ÿ में ही नà¥à¤¯à¤¾à¤¯ मिल पाà¤à¤—ा।
Himachal ki har badi khabar, sabse pehle aapke paas
Breaking news, local updates aur exclusive stories — seedha WhatsApp ya Email par. Free. No spam.
WhatsApp Alerts
Instant news seedha aapke phone par. Ek click me subscribe karein.
Subscribe on WhatsAppEmail Newsletter
Har nayi post ka link aapke inbox me. Kabhi bhi unsubscribe karein.