à¤à¤—वां दà¥à¤°à¥à¤— यानी कांगड़ा लोकसà¤à¤¾ कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° में à¤à¤¾à¤œà¤ªà¤¾ का पॉलिटिकल à¤à¤¸à¥à¤Ÿà¥€à¤®à¥‡à¤Ÿ गड़बड़ हो गया है। शांता कà¥à¤®à¤¾à¤° का पहले चà¥à¤¨à¤¾à¤µ लडऩे के लिठन-न का राग, फिर हाईकमान के आदेश के मà¥à¤¤à¤¾à¤¬à¤¿à¤• हà¥à¤•à¥à¤® का अलाप, अब à¤à¤¾à¤œà¤ªà¤¾ के à¤à¥à¤‚डे पर सिलवटों की वजह बन गया है। दरअसल, अà¤à¥€ हिमाचल à¤à¤¾à¤œà¤ªà¤¾ की लीडरशिप का माइंड सेट यह तो तय मान रहा है कि बकाया तीन लोकसà¤à¤¾ कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤°à¥‹à¤‚ में लगà¤à¤— पà¥à¤°à¤¾à¤¨à¥‡ चेहरे ही रहेंगे। पर कांगड़ा का नाम आते ही अगर-मगर का सियासी कà¥à¤²à¥‡à¤¶ शà¥à¤°à¥‚ हो जा रहा है।
इसकी वजह à¤à¥€ शांता के पारà¥à¤Ÿà¥€ में वजन की तरह ही खूब à¤à¤¾à¤°à¥€-à¤à¤°à¤•म है। हाईकमान के पास हिमाचल की सिरà¥à¤« चार सीटों के लिठवकà¥à¤¤ नहीं है और हिमाचल के किसी à¤à¤¾à¤œà¤ªà¤¾à¤ˆ लीडर के पास इतना दम नहीं है कि वह शांता से उनकी रज़ा जानने की हिमà¥à¤®à¤¤ कर सके। à¤à¤¸à¥‡ में ऊहापोह की सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ बनी हà¥à¤ˆ है। à¤à¤¾à¤œà¤ªà¤¾ यह तय नही कर पा रही है कि कà¥à¤¯à¤¾ इस किले को शांता कà¥à¤®à¤¾à¤° के नाम से ही दोबारा रेनोवेट करे या फिर किसी नठचेहरे को सामने लाकर कोई इनोवेटिव काम करे? पारà¥à¤Ÿà¥€ इस उलà¤à¤¨ में फंसी हà¥à¤ˆ है कि अगर शांता हाईकमान की पसंद न हà¥à¤ तो दूसरा उमà¥à¤®à¥€à¤¦à¤µà¤¾à¤° कौन होगा? कà¥à¤¯à¤¾ कोई à¤à¤¸à¤¾ होगा जिस पर हाईकमान का हाथ होगा? या फिर कोई à¤à¤¸à¤¾ होगा
जिसके सिर पर शांता कà¥à¤®à¤¾à¤° का हाथ होगा? à¤à¤¾à¤œà¤ªà¤¾ काडर में शांता के खिलाफ पहली दफा हो रही साजिशों और हरकतों को देख कर हिमाचल à¤à¤¾à¤œà¤ªà¤¾ à¤à¥€ परेशान है। वजह यह है कि बीते पांच साल से शांता कà¥à¤®à¤¾à¤° पर निषà¥à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¤à¤¾ के आरोपों के चलते सियासी बरकतें à¤à¥€ खतà¥à¤® न हो जाà¤à¤‚। à¤à¤¾à¤œà¤ªà¤¾ की हालत मौजूदा वकà¥à¤¤ में ठीक उस तड़पती हà¥à¤ˆ मछली की तरह है जो समंदर के किनारे रेत पर सांस लेने के लिठहवा में उछलती तो है, मगर साथ में हिलोरे ले रहे अथाह जल तक नहीं पहà¥à¤‚च पाती।
शांता कà¥à¤®à¤¾à¤° के रागों-आलापों की वजह से पारà¥à¤Ÿà¥€ को कोई बीच का रासà¥à¤¤à¤¾ à¤à¥€ नजर नहीं आ रहा है । सूतà¥à¤° इसकी वजह गिनवाते हà¥à¤ कहते हैं कि साल 2014 का लोकसà¤à¤¾ चà¥à¤¨à¤¾à¤µ शांता कà¥à¤®à¤¾à¤° ने खà¥à¤²à¥‡ तौर पर अपना अंतिम चà¥à¤¨à¤¾à¤µ कह कर लड़ा था। वह à¤à¥€ तब जब मोदी की पà¥à¤°à¤šà¤‚ड लहर थी। इस मरà¥à¤¤à¤¬à¤¾ तो लहर à¤à¥€ कोई कहर की तरह बरपने वाली नहीं लग रही है। à¤à¤¾à¤œà¤ªà¤¾ को बड़ी चिंता तो यह सता रही है कि अगर शांता कà¥à¤®à¤¾à¤° का नाम हटा तो नठनाम की फेस वेलà¥à¤¯à¥‚ बनाने में à¤à¥€ वकà¥à¤¤ लगेगा। अगर शांता ही उमà¥à¤®à¥€à¤¦à¤µà¤¾à¤° हà¥à¤ तो à¤à¥€ जी-तोड़ मेहनत करनी होगी।
सूतà¥à¤° कहते हैं कि अगर शांता के नाम का वजन वाला पॉजिटिव जà¥à¤¡à¤¼à¤¾ होगा तो, यह à¤à¥€ हकीकत है कि इनके साथ विकास का वजूद à¤à¥€ नैगिटिव तौर पर बराबर का है। चंबा जिला में सीकरीधार के सीमेंट पà¥à¤²à¤¾à¤‚ट की वजह से शांता का रासà¥à¤¤à¤¾ इस बार सीमेंटेड की बजाठà¤à¤¾à¤œà¤ªà¤¾ नेताओं को ही कचà¥à¤šà¤¾-पकà¥à¤•ा नजर आ रहा है।
कांगड़ा तो वैसे à¤à¥€ सियासी बेइमानियों के लिठमशहूर रहा है। चाहे वह विधानसà¤à¤¾ चà¥à¤¨à¤¾à¤µ हों या लोकसà¤à¤¾à¥¤ इन परिसà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ में à¤à¤• बेहतरीन सियासी माहिर ने à¤à¤¾à¤œà¤ªà¤¾ की सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ कà¥à¤› इस तरह से सà¥à¤ªà¤·à¥à¤Ÿ की। उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने कहा कि जिन नेता जी की वजह से à¤à¤¾à¤œà¤ªà¤¾ पà¥à¤°à¤¦à¥‡à¤¶ में खड़ी हà¥à¤ˆ थी, उनकी ही वजह से लडख़ड़ा रही है…
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