January 15, 2026

1 thought on “Concerns raised over FRA implementation in Himachal: Experts warn against encouraging encroachments

  1. फारेस्ट राइट एक्ट क्रियान्वयन पर सवाल नहीं उठाया
    ———————————————————————

    हिमाचल फारेस्ट रिजनेरेशन मिशन की ओर से मेरे नाम से स्टेट मेंट छापी गई है जिसमें कहा गया है कि मैंने कार्यान्वयन और इस एक्ट की व्याख्या पर सवाल उठाए हैं. मैं कुलभूषण उपमन्यु यह कहना चाहता हूँ कि मैंने ऐसी कोई स्टेटमेंट नहीं दी है. अख़बार में इस आशय की स्टेटमेंट देख कर मुझे हैरानी हुई कि इस तरह मेरे नाम का अनधिकृत प्रयोग क्यों किया गया. हम तो उल्टा हिमाचल सरकार और जनजाति विकास मंत्री नेगी जी को धन्यवाद दे रहे हैं कि इतने वर्षों से लंबित वन अधिकार अधिनियम को लागू करने का काम उन्होंने किया है. हम 2012 से इस एक्ट को लागू करवाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं. अत: मेरी ओर से यह प्रतिवाद छापा जाए और एक बार फिर मैं हिमालय निति अभियान और अपनी ओर से सरकार का इस एक्ट को लागू करने के लिए धन्यवाद देता हूँ. इस एक्ट का नाहक विरोध करने वालों को यह समझना चाहिए कि यह एक्ट वन भूमि को बांटने वाला एक्ट नहीं है, बल्कि 13 दिसंबर, 2005 से पहले के जो वन भूमि आजीविका या आवास आदि के उपयोग में आ चुकी है उस पर उपयोग का अधिकार देने की बात है. जहां पहले से घर बना है वहां कोई घर के ऊपर तो पेड़ नहीं लगा सकता. वन संरक्षण हमारा सबसे बड़ा चिंता का विषय है, किन्तु हमारा मानना है कि आम समाज को वन संरक्षण से जोड़ कर ही वनों की सुरक्षा हो सकती है. स्वयं वन विभाग भी साँझा वन योजना के अच्छे परिणाम देख चूका है. इसलिए समुदायों को जोड़ने का जो काम इस एक्ट द्वारा सामुदायिक अधिकारों द्वारा किया जा रहा है उससे वन संरक्षण का काम मजबूत होगा. समुदायों को बाहर निकाल कर वन विभाग की संपत्ति बना कर वनों के संरक्षण की सोच ब्रिटिश उपनिवेश वादी सोच का नतीजा है, जिससे बहार निकल कर आजीविका आधारित वानिकी को प्रोत्साहन देने की जरूरत है. यह एक्ट यही काम कर रहा है.

    उपमन्यु कुलभूषण


    Kulbhushan Upmanyu
    094184-12853
    01899-265832

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *